हुज़ूर! जन्म प्रमाण पत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही, बच्चों का भविष्य अधर में

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हुज़ूर! जन्म प्रमाण पत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही, बच्चों का भविष्य अधर में

गाजीपुर, 15 अप्रैल 2025: शिक्षा का मौलिक अधिकार हर बच्चे का हक है, लेकिन गाजीपुर जिले के गोविंदपुर कीरत गांव में ग्राम सचिव की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने 9 बच्चों के भविष्य को अंधेरे में धकेल दिया है। बौद्ध कल्याणकारी महिला उत्थान ट्रस्ट के संस्थापक राजकुमार मौर्य और उनकी सहयोगी सामाजिक संस्था “यूनाइटेड मीडिया” के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने इस गंभीर मुद्दे को जिला पंचायत राज अधिकारी, गाजीपुर के समक्ष पत्र के माध्यम से उठाया है। गांव की महिलाओं के साथ मिलकर भ्रष्टाचार के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही यह संस्था बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र न बनने से उत्पन्न संकट को लेकर आक्रोशित है, जिसके चलते बच्चों का स्कूलों में दाखिला रुका हुआ है। मामला गोविंदपुर कीरत गांव का है, जहां 9 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र न होने के कारण उनका स्कूल में प्रवेश में परेशानी हो रही हैं। राजकुमार मौर्य ने बताया कि दो माह पूर्व सभी बच्चों के दस्तावेज पूर्ण कर ग्राम सचिव कुमुद श्रीवास्तव को सौंपे गए थे। लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी जन्म प्रमाण पत्र नहीं बने। जब सचिव से इसकी जानकारी मांगी गई, तो उन्होंने बताया कि शपथ पत्र गलत अंकित हैं। इसके बाद आनन-फानन में ग्राम सभा की एक महिला, सोनम राजभर, को मरदह बाजार में बुलाकर सभी फाइलें सौंप दी गईं। हैरानी की बात यह है कि इन फाइलों में ग्राम प्रधान और आंगनवाड़ी के हस्ताक्षर वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज गायब थे। ग्राम प्रधान सूबेदार यादव ने स्वीकार किया कि उन्होंने सभी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद ही फाइलें सचिव को सौंपी गई थीं। इसके बावजूद, दस्तावेजों के गायब होने और दो महीने तक कोई कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में रोष है। सोनम राजभर ने बताया कि फाइलें अधूरी थीं, जिसके कारण जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इस लापरवाही का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जो शिक्षा के मौलिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। संस्था ने कई गंभीर सवाल उठाए हैं। पहला, क्या ग्राम सचिव का सभी दस्तावेज एक गांव की महिला को सौंपना उचित था? दूसरा, दस्तावेज बच्चों के परिजनों को क्यों नहीं लौटाए गए, जिसने इन्हें सचिव को सौंपा था? तीसरा, महत्वपूर्ण दस्तावेज सचिव के पास से कैसे गायब हो गए? चौथा, यदि दस्तावेजों में कमियां थीं, तो इन्हें वापस करने में दो महीने का समय क्यों लगा? पांचवां, ग्राम सचिव ने बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ क्यों किया? इन सवालों का जवाब न मिलने से ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बौद्ध कल्याणकारी महिला उत्थान ट्रस्ट और यूनाइटेड मीडिया ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए जिला प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग की है। संस्था ने मांग की है कि ग्राम सचिव की लापरवाही की जांच हो, गायब दस्तावेजों का पता लगाया जाए, और बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र तत्काल बनवाकर शिक्षा के मौलिक अधिकारों के तहत स्कूल में दाखिला सुनिश्चित किया जाए। राजकुमार मौर्य ने कहा, “हमारा उद्देश्य गांव के हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार दिलाना है। भ्रष्टाचार और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को भी दर्शाता है। जिला प्रशासन से अपेक्षा है कि वह इस मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई करेगा, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके।हुज़ूर! जन्म प्रमाण पत्र में भ्रष्टाचार और लापरवाही, बच्चों का भविष्य अधर में

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